पवन धीमान. निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग-03 पर जारी लापरवाही और प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर उच्च प्रशासनिक अधिकारियों का दौरा मात्र एक “दिखावा” साबित हुआ। सोमवार को हुए निरीक्षण के दौरान जब पीड़ित निवासियों ने अपनी व्यथा सुनानी चाही, तो अधिकारी उनकी बात सुने बिना ही मौके से भाग खड़े हुए।
*लोगों का गुस्सा फूटा, अधिकारियों ने नहीं दिया कोई जवाब*
कोर्ट से लेकर अवाहदेवी तक, सैकड़ों प्रभावित लोगों ने अधिकारियों के सामने अपनी परेशानियाँ रखीं, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। न ही सुजानपुर के विधायक कैप्टन रंजीत सिंह राणा लोगों के आक्रोश को सहन कर पाए और बीच रास्ते से ही गायब हो गए।
*”यह दौरा महज खानापूर्ति था” – रीना चौहान*
राष्ट्रीय राजमार्ग-03 प्रभावित पीड़ित मंच की अध्यक्ष रीना चौहान ने इस निरीक्षण को औपचारिकता बताते हुए कहा कि प्रशासन ने लोगों की आवाज़ दबाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य इंजीनियर सुशील व्यक्तिगत द्वेष के चलते लोगों के कामों में बाधा डाल रहे हैं।
*कंपनी ने किया फर्जीवाड़ा?*
सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन के निरीक्षण से ठीक पहले नेशनल हाईवे कंपनी ने जगह-जगह मिट्टी डलवाकर असली हालात छिपाने की कोशिश की। यह साफ दिखाता है कि कंपनी गंभीरता से काम करने के बजाय सिर्फ दिखावा कर रही है।
*क्या कहते हैं प्रभावित लोग?*
स्थानीय निवासियों का कहना है कि “अधिकारी आए जरूर, लेकिन समस्या का समाधान किए बिना चले गए।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
प्रशासनिक निरीक्षण के नाम पर हुई यह “मौन मुहिम” प्रभावित लोगों के लिए एक और धोखा साबित हुई है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन सच में लोगों की पीड़ा सुनेगा, या फिर यह खानापूर्ति का सिलसिला जारी रहेगा?
