पवन धीमान, हमीरपुर
मुख्यमंत्री के गृह जिले हमीरपुर की सड़कें आम जनता के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-103 (हमीरपुर-शिमला मटन-सिहन बाईपास से होली तक) की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि अब यह सड़क नहीं, बल्कि ‘खड्डों का अखाड़ा’ बनकर रह गई है। जगह-जगह 9 इंच तक गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से यह मार्ग तालाब जैसा दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
*चालकों की मुश्किलें, जान-माल का खतरा*
इस सड़क पर वाहन चलाना एक चुनौती बन चुका है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है, तो बड़े वाहनों के पलटने का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि “यहाँ कई बार दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं, कुछ लोग घायल भी हुए हैं, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।”
एक बुजुर्ग ने बताया – “इन गड्ढों के कारण वाहनों में झटके लगते हैं, जिससे कमर और रीढ़ की हड्डी की समस्या हो सकती है। अगर कोई तेज गति से आ रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाए, तो बड़ा हादसा हो सकता है!”
*मुख्यमंत्री हेल्पलाइन ने भी किया अनदेखा!*
जनता ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत की, लेकिन जवाब मिला – “यह सड़क हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।” हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से मंत्री और अधिकारी गुजरते हैं, फिर भी उनकी आँखों पर पट्टी बंधी हुई है।
बाईपास से होली तक का यह 2-3 किलोमीटर का हिस्सा पिछले 3 महीने से ऐसे ही पड़ा है। आखिर कब तक जनता को इस दुःखद सड़क पर सफर करना पड़ेगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है?
जनता की मांग है कि बारिश के बाद तुरंत इस सड़क की मरम्मत की जाए, नहीं तो जानलेवा हादसों का दोषी कौन होगा?
