प्रदेश की राजधानी और मुख्यमंत्री के गृह जिले में जनता को एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हिमाचल परिवहन निगम और निजी बस ऑपरेटरों के सैकड़ों वाहनों के खड़े होने से सड़कें जाम हो रही हैं और पैदल चलने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े संकट के बावजूद, इन बसों के लिए शहर में कोई स्थाई पार्किंग व्यवस्था नहीं है।
आए दिन देखा जा रहा है कि निगम की बसें अपनी वर्कशॉप के बाहर ही सड़क पर लगी रहती हैं। वहीं, दूसरे राज्यों से आने वाली निजी बसों को भी सड़क किनारे खड़ा होने को मजबूर होना पड़ता है। इस अव्यवस्था के चलते न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि पैदल चलने वाले राहगीरों को भी सुरक्षित रास्ता न मिलने की वजह से काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
*जनता की आवाज बनी, प्रशासन से मांग तत्काल हल की*
स्थानीय नागरिकों ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के अपने जिले में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त के बाहर है। लोगों ने मांग की है कि इस समस्या का जल्द से जल्द स्थाई समाधान निकाला जाए।
*ट्रैफिक पुलिस ने दी चेतावनी, कार्रवाई का ऐलान*
इस मामले में जिला ट्रैफिक पुलिस इंचार्ज संजय राणा ने स्पष्ट किया कि उनकी टीम इस मामले में गंभीर है। उन्होंने कहा, “सबसे पहले इन वाहन मालिकों और चालकों को चेतावनी (वार्निंग) दी जाएगी। अगर उन्होंने सड़कों पर गैर-कानूनी तरीके से वाहन खड़े करने की आदत नहीं सुधारी, तो उनके खिलाफ यातायात नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
*निगम का पक्ष: जगह की कमी है बड़ी समस्या*
वहीं, जब इस मामले में हिमाचल परिवहन निगम के डिविजनल मैनेजर राजकुमार पाठक से बात की गई, तो उन्होंने अपनी मजबूरी जताई। उनका कहना था, “वर्कशॉप के अंदर बसों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। इसके अलावा, दूसरी जगह पर कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है, जिसकी वजह से हमें बसों को सड़क पर खड़ा करने के अलावा कोई चारा नहीं है। हालाँकि, हम इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और जल्द ही इसका कोई हल निकाल लिया जाएगा।”
अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है, लेकिन जनता की नाराजगी और ट्रैफिक पुलिस की चेतावनी के बाद उम्मीद की जा रही है कि इस गंभीर समस्या की तरफ जल्द ध्यान दिया जाएगा।
