पवन धीमान, हमीरपुर*
प्रशासनिक उदासीनता के चलते, मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले हमीरपुर में एक निर्माणाधीन बस स्टैंड की लापरवाही स्थानीय किसानों के लिए आफत बन गई है। वार्ड नंबर 8, नया नगर के पास चल रहे निर्माण कार्य से उठने वाली मिट्टी ने न केवल फसलों को बर्बाद किया है, बल्कि किसानों के लाखों रुपये की मेहनत पर पानी फेर दिया है। हैरत की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
*मिट्टी का सैलाब, किसानों का सवाल*
स्थानीय किसानों का आरोप है कि बस स्टैंड निर्माण के दौरान निकली मिट्टी को ठीक से नहीं रोका गया, जिसके कारण बारिश का पानी इस मिट्टी को बहाकर पास के नाले में ले जाता है। यही नाला अब उनके खेतों की ओर रुख कर चुका है। नाले से उफनती यह मिट्टी सीधे खेतों में जाकर जम हो रही है, जिससे उनकी उपजाऊ भूमि बंजर होती जा रही है और खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
*लाखों के नुकसान का सामना, प्रशासन बना मूकदर्शक*
एक प्रभावित किसान, रामपाल सिंह, जिनके खेत की सब्जियों की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है, ने कहा, “यह मिट्टी हमारे लिए जहर बनकर आ रही है। हमने मेहनत से तैयार की गई फसल मिट्टी के नीचे दब गई है। हमारा लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।”
स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा था, लेकिन उसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। निर्माण कार्य जारी है और मिट्टी का अतिक्रमण भी।
*नाले के रुख में बदलाव ने बढ़ाई मुसीबत*
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण शुरू होने से पहले इस इलाके के नाले का पानी दूसरी दिशा में बहता था। लेकिन निर्माण कार्य के दौरान हुई खुदाई और मलबे के ढेर ने नाले के प्राकृतिक रास्ते को बदल दिया है। अब यही नाला उनके खेतों और आवासीय क्षेत्रों की ओर मुड़ गया है, जिससे न केवल खेतों बल्कि घरों को भी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
इस मामले पर संबंधित अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि शिकायत मिली है और मामले की जांच की जा रही है। एक वरिष्ठ अभियंता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं कि वह मिट्टी के प्रबंधन और नाले के रुख को लेकर तत्काल उचित कदम उठाए। जल्द ही इसका समाधान निकाल लिया जाएगा।”
हालाँकि, प्रभावित लोगों का कहना है कि अब ‘जांच’ और ‘आश्वासन’ से काम नहीं चलेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया और निर्माण कार्य रोककर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
