हमीरपुर , पवन धीमान:
लगातार दो दिन से हो रही मूसलाधार बारिश ने जिला हमीरपुर में त्राहिमाम मचा दिया है। प्रकृति के इस कहर ने न केवल आम जनजीवन को ठप कर दिया है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र और नागरिक सुविधाओं के लिए जिम्मेदार सभी विभागों की तैयारियों की पोल भी खोलकर रख दी है। जिलेभर में सड़कें टूटी हैं, भूस्खलन के हादसे हो रहे हैं, और जलभराव की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
*जिलाधीश आवास तक को खतरा:*
सबसे चिंताजनक स्थिति जिलाधीश के आवास स्थान के निकट उत्पन्न हुई है। पिछली बारिश में हुए भूस्खलन के बाद एक बार फिर डांगे का एक बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा है, जिससे मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गया है और जिलाधीश के निवास स्थान को भी संभावित खतरा पैदा हो गया है। इस घटना ने प्रशासनिक इमारारतों की सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

*राष्ट्रीय राजमार्ग और अमरोहा रोड हुए बंद:*
राष्ट्रीय राजमार्ग 103 (धर्मशाला-शिमला) पर जिले के कई स्थानों पर भीषण भूस्खलन हुआ है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। वहीं, अमरोह रोड पर एक विशाल चीड़ का पेड़ गिरने से मार्ग लंबे समय तक बंद रहा। इस घटना में बिजली विभाग के उपकरण भी क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे हजारों रुपये का नुकसान हुआ है।
*निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के पास सड़क धंसी:*
जिले की दुर्दशा का एक और चौंकाने वाला उदाहरण निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के समीप देखने को मिला, जहाँ सड़क का एक तरफ़ का हिस्सा पूरी तरह से धंस गया है। हैरानी की बात यह है कि न तो पानी की निकासी का कोई इंतजाम है और न ही अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया है।
*मुख्यालय में जलभराव से अफरातफरी:*
हमीरपुर मुख्यालय से हाथली पुल के निकट भी जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है। यहाँ पानी की निकासी न होने के कारण पैदल यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि रात के अंधेरे में कुछ अतिअभियान लोग मिट्टी डंप कर देते हैं, जिससे नालियाँ बंद हो गई हैं और समस्या और विकट हो गई है।
*जनता की प्रशासन से अपील:*
इस संदर्भ में स्थानीय टैक्सी यूनियन के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से तत्काल कार्यवाई की मांग की है। उनका कहना है कि “हम प्रशासन से गुहार लगाते हैं कि जलभराव और भूस्खलन की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। लोगों की सुरक्षा और convenience को ध्यान में रखते हुए त्वरित और ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है।”
मौजूदा हालात यह साबित करने के लिए काफी हैं कि आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे के मामले में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं। आम जनता सवाल कर रही है कि आखिर उनके टैक्स के पैसों का इस्तेमाल कहाँ हो रहा है? ऐसे में, प्रशासन का यह फर्ज़ बनता है कि वह न केवल तात्कालिक राहत कार्य शुरू करे, बल्कि दीर्घकालिक योजना बनाकर भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने की तैयारी भी सुनिश्चित करे।
