पवन धीमान, हमीरपुर।
जिले में खाद्य सुरक्षा की निगरानी करने वाली एक अत्याधुनिक मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (लेब तकनीकी वैन) मार्च महीने से बेकार खड़ी है। केंद्र सरकार से बजट न मिलने का हवाला देकर इस महत्वपूर्ण वाहन का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है। इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि इस वैन पर तैनात दो आउटसोर्स कर्मचारियों और ड्राइवर को भी मार्च के बाद से उनका वेतन नहीं मिला है, जिसके चलते उनके परिवार की माली हालत खस्ता हो गई है।
फूड सेफ्टी विभाग हमीरपुर की यह विशेष गाड़ी खुले मैदान में खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र करने और उनकी तत्काल रिपोर्ट जनता को उपलब्ध कराने के लिए तैनात थी। यह व्यवस्था आम जनता को खराब और मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने की दिशा में एक अहम कड़ी थी। लेकिन बजट के अभाव में यह सेवा ठप पड़ी है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस मोबाइल टेस्टिंग वैन का सालाना बजट करीब 8 करोड़ रुपये है, जिसमें वाहन का खर्च, कर्मचारियों के वेतन और अन्य व्यय शामिल हैं।
इस पूरे प्रकरण की जड़ केंद्र और राज्य सरकार के बीच होने वाला एमओयू (समझौता ज्ञापन) है। हर साल की तरह इस बार भी एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं और उसे केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। लेकिन केंद्र से बजट के आवंटन में हो रही देरी के कारण गाड़ी चलना मुश्किल है। विभाग का कहना है कि बजट का प्रावधान न होने के कारण गाड़ी को खड़ा करना पड़ा है और कर्मचारियों का वेतन भी अटका पड़ा है।
फूड एंड सेफ्टी विभाग के निदेशक ने इस बारे में पूछताछ करने पर बताया, “यह गाड़ी केंद्र सरकार द्वारा आवंटित की गई है। केंद्र से बजट न मिल पाने के कारण हमें यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, एमओयू प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उम्मीद है कि जल्द ही बजट आवंटित हो जाएगा।” उन्होंने कर्मचारियों के वेतन और गाड़ी की सेवाएं शीघ्र बहाल होने की भी उम्मीद जताई।
इस गाड़ी के ठप पड़ने का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। अब मिलावटी सामग्री की जांच के लिए त्वरित रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया है। यह स्थिति जिले में खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ा अवरोध बन गई है।
स्पष्ट है कि सरकारी लालफीताशाही और बजटीय देरी ने न केवल एक महत्वपूर्ण जनसुरक्षा परियोजना को धरातल पर बैठा दिया है, बल्कि मेहनतकश कर्मचारियों के घर का चूल्हा भी ठंडा कर दिया है। अब देखना यह है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल से यह गतिरोध कब टूटता है और जनता को फिर से वह सुरक्षा कवच मिल पाता है।
