हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने प्रदेश सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि सुक्खू सरकार ने हिमाचल को आर्थिक इमरजेंसी के कगार पर पहुंचा दिया है, और हर वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। आज यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों, पेंशनरों, ठेकेदारों और समाज के विभिन्न वर्गों के हक मारकर अपने नजदीकी मित्रों पर जनता का पैसा खुलकर लुटा रही है।
राजेंद्र राणा ने कहा कि घाटे में चल रहे विभिन्न निगमों में कर्मचारियों की सैलरी तक के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन सरकार अपने चहेतों को इन निगमों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाकर मोटे वेतन और सुविधाएं दे रही है, जिसका सीधा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक आपदा का बहाना बनाकर सरकार पंचायत चुनाव टाल रही है, जबकि दूसरी ओर सत्ता में तीन साल पूरे होने का जश्न जनता के टैक्स के पैसों से मनाया जा रहा है। राणा ने तंज कसते हुए कहा कि “इस सरकार में सिर्फ मुख्यमंत्री के मित्र मौज कर रहे हैं, जबकि सामान्य कांग्रेस कार्यकर्ता भी अपनी उपेक्षा पर रो रहे हैं।”
राजेंद्र राणा ने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश को विकास के मामले में कई दशक पीछे धकेल दिया है और कर्ज लेने के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि यह सरकार विकास नहीं, बल्कि केवल मित्रों की मेहरबानी सरकार बनकर रह गई है।
राजेंद्र राणा ने यह भी कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कई विभागों में जरूरी विकास कार्य ठप पड़े हैं। प्रदेश में निवेशक और उद्यमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और नए निवेश बंद हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इसी तरह खर्च और कर्ज का खेल खेलती रही तो आने वाले दिनों में प्रदेश को गंभीर आर्थिक संकट से कोई नहीं बचा पाएगा।
