बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया पर जागरूकता हेतु कार्यशाला का आयोजन

ज़िला बाल संरक्षण इकाई मण्डी द्वारा बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को समझाने बारे एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विभागों और स्वयं सेवी संस्थानों के करीब 50 सक्रिय सदस्यों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला में जिला बाल संरक्षण अधिकारी एन. आर. ठाकुर ने कहा कि भारत सरकार द्वारा दतक ग्रहण अधिनियम 2022 को सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है। इसके अंतर्गत कोई भी दंपति, एकल महिला या पुरुष बच्चा गोद ले सकता है। दतक ग्रहण की प्रक्रिया की शुरुआत सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स ऑथोरिटी की वेबसाइट से ऑनलाइन होती है। इसके अलावा नजदीक लोक मित्र केंद्र, साइबर कैफे या ज़िला बाल संरक्षण अधिकारी के कार्यालय में जाकर भी आवेदन कर सकेंगे। ठाकुर ने कहा कि इसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, विवाह प्रमाण पत्र, मेडिकल फिटनेस, जन्म प्रमाण पत्र व पासपोर्ट साइज फोटो जैसे आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा करवाने होते हैं।

उन्होंने कहा कि लोगों को बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया की सही और सटीक जानकारी न होने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए इस बारे जनमानस को जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2030 तक “बाल विवाह मुक्त भारत” के लिए मंडी जिला का भी योगदान हो सके।

इस अवसर पर सरंक्षण अधिकारी शैलजा अवस्थी ने प्रतिभागियों को दतक ग्रहण अधिनियम, बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया, योग्यता और सही मानदंडों बारे जानकारी दी। विधिक एवं प्रोबेशन अधिकारी रमा कुमारी ने बाल विवाह अधिनियम और दुष्परिणामों बारे चर्चा की। बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन तृप्ता ठाकुर ने प्रतिभागियों को बाल विवाह के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने की शपथ दिलाई।

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Author: powan dhiman

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