पवन धीमान, हमीरपुर।
नगर निगम की टीम द्वारा शहर का निरीक्षण और अव्यवस्था के खिलाफ चेतावनी के बावजूद, आरोप लग रहे हैं कि प्रशासन बड़े और धनी व्यापारियों के प्रति नरम रवैया अपनाता है, जबकि छोटे रेहडी वालों और दुकानदारों के प्रति सख्ती बरतता है। लोगों का आरोप है कि अधिकारी ‘धनी सेठों’ की दुकानों पर नाले के ऊपर और फुटपाथ पर सामान की सजावट को नजरअंदाज करते हैं, जबकि छोटे व्यवसायियों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।
शहर में सफाई अभियान की तारीफ हो रही है, लेकिन अतिक्रमण पर अंकुश न लगने से नागरिक नाराज हैं। मुख्य बाजार और नगर निगम कार्यालय के आस-पास के इलाकों में कई बड़ी दुकानों का सामान सार्वजनिक रास्तों और नालियों को अवरुद्ध करता देखा जा सकता है। हालांकि, निगम की कार्रवाई अक्सर सीमित दायरे में ही दिखाई देती है।
स्थानीय छोटे व्यापारी और रेहड़ी फड़ी वाले सवाल उठा रहे हैं: “क्या नियम सिर्फ गरीबों और छोटे लोगों के लिए ही हैं? क्या पैसे और हैसियत के आगे नगर निगम की टीम आंखें मूंद लेती है?” उनका आरोप है कि अधिकारी बड़े दुकानदारों के सामने से आंखें चुराकर निकल जाते हैं, जबकि उन्हें बार-बार परेशान किया जाता है और ‘सामान नाले से ऊपर रखने’ की सख्त हिदायत दी जाती है।
नागरिकों का कहना है कि इस तरह के भेदभाव से शहर की स्वच्छता और अनुशासन के प्रयासों पर पानी फिर रहा है। उन्होंने नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों से मांग की है कि वे निष्पक्ष और समान नीति अपनाएं, और बिना किसी भेदभाव के अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करें। इस मामले पर नगर निगम आयुक्त से प्रतिक्रिया का इंतजार है।
