राष्ट्रीय राजमार्ग-03 का निर्माण कार्य पिछले चार साल से चल रहा है, लेकिन हमीरपुर से अवाहदेवी तक का यह हिस्सा आज भी जनता के लिए एक भयावह सपना बना हुआ है। इस ‘राष्ट्रीय’ राजमार्ग की हालत इतनी दयनीय है कि लोग इसे पार करने को अपनी जिंदगी से जूझने जैसा बता रहे हैं। अनु से टोनी देवी तक का रास्ता ऐसा उखड़ा और टेढ़ा-मेढ़ा है कि दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों के लिए गुजरना एक साहसिक और जोखिम भरा कार्य बन गया है।
*नेताओं की गाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन बात नहीं होती!*
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इसी सड़क मार्ग से पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर, सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा और वर्तमान कांग्रेस विधायक कैप्टन रंजीत सिंह राणा जैसे बड़े नेता अपनी महंगी शीशेबंद गाड़ियों में आते-जाते हैं, लेकिन जनता की पीड़ा सुनने या समाधान के लिए कोई पहल नहीं करते। लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि नेताओं की लंबी-चौड़ी घोषणाओं और दावों के बीच यह मार्ग उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
*कंपनी का रवैया लापरवाह, न बोर्ड न सुरक्षा!*
निर्माण कार्य में लगी कंपनी के कार्यों पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि न तो कंपनी के अधिकारी मौके पर नजर आते हैं, न ही धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव होता है। हैरानी की बात यह है कि जहां-जहां काम चल रहा है, वहां निर्माण कार्य का कोई साइनबोर्ड तक नहीं लगा है, जिससे यात्रियों और चालकों को खतरे का आभास हो सके। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर किसी बड़े हादसे का शिकार होना पड़ा, तो जिम्मेदार कौन होगा?
*तारकोल से सीमेंट तक: गुणवत्ता पर बड़े सवाल!*
पहले तारकोल से बनाए गए रास्ते बरसात में धंस गए। अब कंपनी कई जगहों पर तारकोल के बजाय सीमेंट डालकर सड़क पक्का कर रही है। जनता का सीधा सवाल है कि क्या यह सीमेंट वाला रास्ता कब तक टिकेगा? करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी टिकाऊ सड़क न मिलने से लोगों का भरोसा उठ गया है। टोनी देवी बाजार सहित पूरे क्षेत्र में अब जनाक्रोश साफ देखा जा सकता है। लोग कहते हैं, “पानी सर से ऊपर हो चुका है। चार साल से हम इंसान नहीं, गिनती के पुतले बने हुए हैं।”
आखिर कब होगा इस ‘राष्ट्रीय राजमार्ग’ का निर्माण पूरा? कब सुनेगी सरकार और प्रशासन इन आवाजों को? जनता के पास अब सवालों का पहाड़ है, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं। यह सड़क उनकी रोजमर्रा की जद्दोजहद का केंद्र बन चुकी है, जबकि यह उनका मूल अधिकार और सरकार की मूल जिम्मेदारी है।
