पवन धीमान, हमीरपुर।
जिला मुख्यालय के बस स्टैंड क्षेत्र में रात की शांति अब शराब के नशे में धुत लोगों की अश्लील हरकतों और गंदगी की भेंट चढ़ रही है। आम नागरिकों का आरोप है कि यहां स्थित शराब की दुकानें (वाइन शॉप) अंधाधुंध मात्रा में शराब बेचकर न केवल सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ रही हैं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन के नाक के नीचे चल रही इस अनियंत्रित गतिविधि पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नज़र नहीं आ रही।
स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात तक इन दुकानों से निकलने वाले लोग इतने अधिक नशे में होते हैं कि वे फुटपाथों पर ही गिरे रहते हैं या नालियों में पड़े मिलते हैं। पुलिस विभाग के निरंतर प्रयासों के बावजूद, यह समस्या दिन-ब-दिन विकराल रूप लेती जा रही है। नशेड़ियों की बढ़ती संख्या ने बस स्टैंड क्षेत्र को रात में असुरक्षित क्षेत्र बना दिया है।
जनता की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि वाइन शॉप संचालकों को क्यों इतनी बड़ी मात्रा में शराब बेचने की छूट दी गई है? क्या उनका एकमात्र उद्देश्य टैक्स के नाम पर पैसा इकट्ठा करना और अपनी दुकानदारी चमकाना है? लोगों का आरोप है कि इन दुकानों से बेहद नशे में धुत लोगों के निकलने और देर रात तक खुले रहने के बावजूद, न तो एक्साइज विभाग और न ही कोई अन्य प्रशासनिक विभाग कार्रवाई करता दिख रहा है। एक्साइज विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास करने पर भी उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।
*नशा निवारण बोर्ड की राय: ‘बातचीत से ही समाधान’*
इस मामले पर नशा निवारण बोर्ड के अध्यक्ष नरेश ठाकुर का कहना है कि पहले भी इस तरह की शिकायतें मिलती रही हैं और प्रशासन नियमित रूप से कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा, “अगर कोई और उचित कदम उठाना पड़े, तो वह सरकार और प्रशासन से बातचीत के बाद ही संभव हो पाएगा।”
पड़ोसी जिले ने उठाया कड़ा कदम
जबकि हमीरपुर में यह समस्या बेकाबू होती जा रही है, पड़ोसी जिला उना में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए रात 10 बजे के बाद सभी वाइन शॉप बंद करने का आदेश पारित किया है। यह कदम उना में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में मददगार साबित हो रहा है।
*नागरिकों की मांग: हमीरपुर में भी लागू हो समय सीमा*
हमीरपुर के नागरिक अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि वह उना जिले की तर्ज पर यहां भी रात 10 बजे के बाद शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए और सार्वजनिक स्थानों पर नशाखोरी रोकने के लिए ठोस निगरानी तंत्र स्थापित करे। उनका सवाल साफ है – क्या प्रशासन नशा माफिया के आगे नतमस्तक है, या फिर आम जनता की सुरक्षा और सम्मान उसके लिए प्राथमिकता है? इस सवाल का जवाब तभी मिलेगा, जब जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करेगा।
