जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में हाल ही में हुई हिंसा के एक सप्ताह बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर परिषद की टीम ने पठान कॉलोनी क्षेत्र में अवैध रूप से बने मकानों और बूचड़खानों पर बुलडोजर चलाया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल और आरएसी की तैनाती की गई है।
दरअसल, 29 दिसंबर को मस्जिद के बाहर रेलिंग लगाने को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई, जो बाद में हिंसक रूप ले बैठी। उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थीं।
हिंसा में घायल छह पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर चार से अधिक थानों की पुलिस और आरएसी की एक कंपनी तैनात की गई थी।
घटना के बाद प्रशासन ने 24 कथित पत्थरबाजों के घरों पर नोटिस चस्पा कर तीन दिन में जवाब मांगा था। नोटिस की मियाद 31 दिसंबर को पूरी होने के बाद आज नगर परिषद ने कार्रवाई शुरू की। पहले चरण में 20 अवैध बूचड़खानों और 4 अवैध निर्माणों को हटाया गया।
क्या है पूरा मामला?
चौमूं में हिंसा की जड़ मस्जिद के पास शहर की ओर से प्रस्तावित रेलिंग लगाने को लेकर विवाद रही। हिंसा से पहले पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें सड़क पर रखे पत्थर हटाने पर सहमति बनी थी। लेकिन पत्थर हटते ही कुछ लोगों ने रेलिंग लगाने का प्रयास शुरू कर दिया। पुलिस ने जब इसे रोकने की कोशिश की, तो समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने पथराव कर दिया, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।
