राष्ट्रीय राजमार्ग-03 के निर्माण में लगी कंपनी पर अब ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। अप्पर द्रोगन और दरकोटी गांवों के लोगों ने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है—
“अब भरोसे की कोई गुंजाइश नहीं बची, या रास्ते बहाल होंगे या काम नहीं होगा।”
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी दिन में अधिकारियों के सामने काम रोकने की बात करती है, जबकि रात के अंधेरे में चोरी-छिपे टारिंग और निर्माण कार्य किया जा रहा है। यही कारण है कि गांव के महिला-पुरुष अब खुद रात-रात भर सड़कों पर पहरा देने को मजबूर हैं।
डेढ़ साल से बर्बाद ज़िंदगी, लेकिन कंपनी बेपरवाह
ग्रामीणों ने बताया कि बीते करीब डेढ़ साल से उनके खेत मलबे में दबे पड़े हैं, संपर्क मार्ग पूरी तरह खत्म हो चुके हैं और गांवों को जोड़ने वाला लिंक रोड बंद है।
स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर बुजुर्ग और मरीज तक — हर कोई इस निकम्मे निर्माण प्रबंधन का खामियाजा भुगत रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने न तो वैकल्पिक रास्ते बनाए, न ही खेतों और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई की।
प्रशासन के सामने भी खुली चेतावनी
शनिवार को गुस्साए ग्रामीणों ने तहसीलदार टोनी देवी और पुलिस चौकी प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए दो टूक चेतावनी दी—
“जब तक हमारे रास्ते और लिंक रोड बहाल नहीं होंगे, तब तक एनएच-03 पर एक इंच भी काम नहीं होने देंगे।”
ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया कि
“अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है, तो फिर रात के अंधेरे में काम क्यों?”
उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि अब उनका आंदोलन सिर्फ धरने तक सीमित नहीं रहेगा।
अगर कंपनी की मनमानी बंद नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन, चक्का जाम और निर्माण स्थल पर स्थायी मोर्चा लगाने को मजबूर होंगे।
महिलाएं बनीं आंदोलन की अगुवाई
इस आंदोलन की कमान अब गांव की महिलाएं संभाल रही हैं। दरकोटी महिला मंडल की प्रधान और वार्ड सदस्य सुमन कुमारी ने साफ कहा—
“हम अपने गांव के रास्ते और हक लेकर रहेंगे, चाहे हमें सड़क पर ही क्यों न बैठना पड़े।”
