जब शिक्षा लक्ष्य नहीं, चरित्र गढ़ने का माध्यम बनती है

आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में जहां शिक्षा को केवल अंक, रैंक और करियर से जोड़ा जा रहा है, वहीं कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल नेरी में आयोजित वार्षिक पारितोषिक समारोह ने यह याद दिलाया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल सफल व्यक्ति बनाना नहीं, बल्कि अच्छा इंसान गढ़ना है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों की ऐसी सीख दी, जो पाठ्यपुस्तकों से कहीं आगे जाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—

“लक्ष्य चाहे जो भी हो, लेकिन ईमानदार इंसान बनना अनिवार्य है।”

उनके ये शब्द केवल भाषण नहीं थे, बल्कि आज की पीढ़ी के लिए एक गहरी चेतावनी और दिशा दोनों थे।

शिक्षा और चरित्र का संतुलन जरूरी

डॉ. वर्मा ने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि हर पेशा—चाहे वह शिक्षक हो, डॉक्टर, इंजीनियर या राजनेता—देश निर्माण की नींव होता है। समस्या पेशे में नहीं, बल्कि मूल्यों के अभाव में है। जब शिक्षा चरित्र निर्माण से कट जाती है, तब समाज में अविश्वास, भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता जन्म लेती है।

राजनीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज नेता शब्द को संदेह की नजर से देखा जाता है। इसका कारण यह है कि कुछ लोग धर्म और भावनाओं का उपयोग व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए करते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को विवेकशील नागरिक बनना होगा—जो सच और झूठ में फर्क कर सकें।

आस्था हो, लेकिन चरित्र सर्वोपरि

डॉ. वर्मा का संदेश गहराई से छूने वाला था—

“भगवान भोलेनाथ के भक्त बनो, लेकिन जीवन में चरित्र श्रीराम जैसा हो—रावण जैसा नहीं।”

यह कथन बताता है कि आस्था तभी सार्थक है, जब उसके साथ नैतिकता और मर्यादा जुड़ी हो।

नशा मुक्त भविष्य : शिक्षा की सबसे बड़ी परीक्षा

अपने संबोधन में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के गंभीर सामाजिक संकट—नशा और चिट्टा—पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुखु का सपना नशा मुक्त हिमाचल है, और सुख आश्रय योजना यह दर्शाती है कि सरकार बच्चों और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है।

लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस लड़ाई में सरकार अकेली सफल नहीं हो सकती। विद्यालय, अभिभावक और समाज—तीनों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।

सम्मान नहीं, संस्कार असली पुरस्कार

कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, लेकिन इस समारोह की सबसे बड़ी उपलब्धि ट्रॉफी या प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि वह संदेश था जो बच्चों के मन में अंकित हुआ—कि सफलता का अर्थ केवल आगे निकलना नहीं, बल्कि सही रास्ते पर चलना है।

कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल नेरी का यह आयोजन एक उदाहरण है कि जब शिक्षा संस्थान संस्कारों को प्राथमिकता देते हैं, तभी समाज को जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक मिलते हैं।

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Author: powan dhiman

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