हमीरपुर से मंडी तक निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग-03 अब विकास का नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही और ठेकेदार राज का प्रतीक बनता जा रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं— “जैसे इंडिया–पाकिस्तान का युद्ध चल रहा हो।” जहां देखो, सड़क उखड़ी पड़ी है, धूल, गड्ढे और जाम ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीमेंट से पैच वर्क आखिर किस नियम के तहत किया जा रहा है? क्या अब राष्ट्रीय राजमार्ग भी पंचायत सड़क की तरह बनाए जाएंगे? यह पहला मौका है जब किसी NH पर इस तरह का प्रयोग किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर गुणवत्ता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
कंपनी न तो अपनी डेली प्रोग्रेस रिपोर्ट जनता के सामने रख रही है और न ही यह बताने को तैयार है कि काम कब पूरा होगा। क्या कंपनी सरकार से ऊपर है? या फिर सरकार ही आंखें मूंदे बैठी है?
राष्ट्रीय राजमार्ग का मतलब होता है—सीधी, चौड़ी और सुरक्षित सड़क, लेकिन NH-03 पर तीखे मोड़, कम चौड़ाई और अधूरा काम हादसों को खुला निमंत्रण दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, NH की चौड़ाई कम से कम 15 मीटर होनी चाहिए, मगर यहां मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।लेकिन जनता पूछ रही है—क्या निरीक्षण से सड़क बन जाएगी? क्या दोषी कंपनी पर कार्रवाई होगी? या फिर हमेशा की तरह रिपोर्ट बनेगी और फाइलें बंद हो जाएंगी?अगर इस मार्ग पर कोई बड़ा हादसा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—ठेकेदार की, अधिकारियों की या फिर नेताओं की?अब NH-03 सिर्फ सड़क नहीं रहा, बल्कि यह सवाल बन गया है—विकास के नाम पर जनता से कब तक धोखा?
