ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अब यह लड़ाई कंपनी से नहीं, सिस्टम से है। हमीरपुर में विकास के नाम पर जनता को डराया जा रहा है…

एनएच 03 हमीरपुर से मण्डी निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग अब विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बनता जा रहा है। करीब डेढ़ साल से स्थानीय ग्रामीण निर्माण कंपनी की मनमानी, झूठे आश्वासनों और कथित पुलिसिया दबाव को झेल रहे हैं, लेकिन न तो जिला प्रशासन सुन रहा है और न ही जनप्रतिनिधि ज़मीन पर उतर रहे हैं।

खसरा नंबर 1061 से जुड़ा मामला इस पूरे प्रोजेक्ट की पोल खोलता है। वर्षों से गांव की पानी की निकासी जिस रास्ते से होती थी, उसे बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बंद कर दिया गया। दो पुलियों का काम जानबूझकर अधूरा छोड़ा गया, पुराना रास्ता खत्म कर दिया गया और पूर्वजों के समय से मौजूद कुओं को भी मिट्टी में दफना दिया गया। सवाल यह है कि क्या यही है सरकार का “डबल इंजन विकास मॉडल”?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब वे निर्माण कंपनी के अधिकारियों से जवाब मांगते हैं, तो उन्हें तारीख पर तारीख दी जाती है। साइट इंजीनियर अंकित अब पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच रहा है, जिससे साफ संदेश दिया जा रहा है कि सरकार सड़क कंपनी के साथ है, जनता के साथ नहीं।

सबसे गंभीर मामला महिलाओं के अपमान का है।

एनएच 03 पीड़ित मंच की अध्यक्ष रीना चौहान ने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने महिलाओं से कहा

“औरतों का काम सिर्फ सड़क पर खड़े होना है।”

यह बयान केवल महिलाओं का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र का अपमान है। सवाल यह है कि क्या प्रदेश सरकार इस बयान का संज्ञान लेगी या फिर चुप्पी साधे रहेगी?

ग्रामीणों का कहना है कि जब चुनाव आते हैं तो नेता विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आज लोगों को न पीने का पानी मिल रहा है, न आने-जाने का रास्ता।

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि पानी की निकासी और रास्ते का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो एनएच-03 पर चक्का जाम कर निर्माण कार्य पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अब यह लड़ाई कंपनी से नहीं, सिस्टम से है।

हमीरपुर में विकास के नाम पर जनता को डराया जा रहा है…

एनएच-03 की तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं

क्या सड़क जनता के लिए बन रही है या कंपनी और सरकार के गठजोड़ के लिए?

डेढ़ साल से पानी की निकासी बंद है, रास्ते खत्म कर दिए गए हैं…

लेकिन सरकार खामोश है।

जब ग्रामीण सवाल पूछते हैं, तो जवाब में पुलिस भेज दी जाती है

“औरतों का काम सिर्फ सड़क पर खड़े होना है।

ये सिर्फ एक गांव का मुद्दा नहीं है

ये लोकतंत्र, महिलाओं के सम्मान और जनता के अधिकारों का सवाल है।

क्या सांसद और विधायक ज़मीन पर उतरेंगे?

या फिर एनएच-03 पर जनता का गुस्सा सरकार के लिए अगला राजनीतिक तूफान बनेगा?

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Author: powan dhiman

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