निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग-03 एक बार फिर बड़ी लापरवाही और घोर अनदेखी की वजह से सुर्खियों में है।
कोल्हूसिद्ध से बराड़ा के बीच गिरता हुआ डंगा इस बात का सबूत है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद एनएच-03 की हालत किसी सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी नहीं, बल्कि हादसों को खुला न्योता देने वाली बन चुकी है।
23 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 3 बजे तक यह डंगा पूरी तरह जर्जर अवस्था में था।
डंगे के नीचे से मिट्टी लगातार दरकती रही, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि न तो निर्माण कंपनी ने समय रहते कोई मरम्मत की और न ही एनएच प्राधिकरण ने यातायात रोकने या इलाके को सुरक्षित करने की जहमत उठाई।
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि डंगा अब तक गिर चुका होगा या कभी भी भरभराकर गिर सकता है। सवाल यह है कि अगर इस दौरान कोई वाहन या राहगीर इसकी चपेट में आ जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
यह कोई पहली घटना नहीं है।
एनएच-03 पिछले कई वर्षों से घटिया निर्माण, गलत डिजाइन और कमजोर गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। जगह-जगह तीखे मोड़, असंतुलित डंगे और बिना सुरक्षा इंतजामों के अधूरा निर्माण इस हाईवे को राष्ट्रीय राजमार्ग कम और खतरनाक ट्रैक ज्यादा बना रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि ऐसे हालातों के बावजूद जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। न तो मौके पर इंजीनियर दिखाई देते हैं, न ही किसी तरह की चेतावनी या बैरिकेडिंग की गई है।
यह लापरवाही सीधे तौर पर आम जनता की जान से खिलवाड़ है।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि डंगा क्यों गिर रहा है, बल्कि यह भी है कि
क्या एनएच-03 में किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह हाईवे यूं ही भ्रष्टाचार, लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ता रहेगा?
एनएच-03 की मौजूदा हालत यह चीख-चीख कर कह रही है कि अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अगली खबर किसी डंगे की नहीं, बल्कि किसी जानलेवा हादसे की हो सकती है।
