पवन धीमान, हमीरपुर।
जिले में नशा मुक्ति का संकल्प लेकर चल रहा पुलिस का विशेष अभियान अब रंग ला रहा है। दिन-रात चल रही पुलिस की कार्रवाई में पिछले एक माह के भीतर ही 10 से 12 नशा तस्करों व नशेड़ियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जिसकी जनता और समाजसेवियों ने जमकर सराहना की है। हालांकि, लोगों ने न्यायपालिका से भी गुहार लगाई है कि ऐसे आरोपियों को कड़ी सजा मिले ताकि पुलिस की मेहनत बेकार न जाए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस ने जिले में नशे के खिलाफ जिस तत्परता से अभियान चलाया है, वह सराहनीय है। लेकिन चिंता की बात यह है कि गिरफ्तार आरोपी अक्सर जमानत पर बाहर आकर फिर से उसी धंधे में लग जाते हैं। इससे पुलिस के प्रयासों पर पानी फिरता है और अपराधियों में भय की जगह बेखौफी पैदा होती है। लोगों की मांग है कि नशे के कारोबार से जुड़े आरोपियों को किसी भी कीमत पर न बख्शा जाए।
*व्यापार मंडल प्रधान सुमित ठाकुर ने कहा:*
“हमीरपुर पुलिस ने जिले में सबसे ज्यादा नशा तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा है। अन्य क्षेत्रों के मुकाबले यहां कार्रवाई ज्यादा प्रभावी है। लेकिन ‘चिट्टे’ का जाल पूरे जिले में है। हमारी न्यायपालिका और प्रशासन से अपील है कि ऐसे आरोपियों को आसानी से जमानत न दें। सरकार को भी नशे के खिलाफ और कठोर कानून बनाने चाहिए, ताकि युवाओं का भविष्य बच सके।”
*पुलिस की रणनीति: न बदलेगा ताप, न थमेगा अभियान*
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। दिन-रात की गश्त, गुप्तचर सूचना और स्थानीय सहयोग से नशा तस्करी के नेटवर्क को उखाड़ने में सफलता मिल रही है। उनका कहना है कि जनता का सहयोग इस लड़ाई में सबसे बड़ा हथियार है।
विश्लेषकों का मानना है कि नशे जैसी सामाजिक बुराई पर स्थायी विजय तभी मिलेगी जब पुलिस की कार्रवाई, न्यायालयों का कड़ा रुख और समाज की सजगता एक साथ काम करेंगे। हमीरपुर में शुरू हुई यह पहल यदि सभी क्षेत्रों में दोहराई जाए और कानूनी प्रक्रिया तेज व सख्त हो, तो नशे का अंधेरा जरूर छंट सकता है।
