हमीरपुर शहर के गौड़ा क्षेत्र में संचालित एक नशा मुक्ति केंद्र में 29 वर्षीय युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस जगह युवाओं को नशे से बाहर लाने का दावा किया जाता है, वहीं एक युवक की मौत होना व्यवस्था की बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।
मृतक की पहचान साहिल ठाकुर (29) निवासी लोअर बरोट, फतेहपुर तहसील सरकाघाट, जिला मंडी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार साहिल को 27 जनवरी को उपचार के उद्देश्य से गौड़ा स्थित नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया गया था। लेकिन महज कुछ ही दिनों में युवक की मौत ने परिजनों सहित पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक रविवार दोपहर युवक को नशा मुक्ति केंद्र में अचेत अवस्था में पाया गया। सवाल यह उठता है कि केंद्र में तैनात स्टाफ उस समय कहां था और समय रहते चिकित्सा सहायता क्यों नहीं दी गई? अचेत पाए जाने के बाद युवक को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कुलवंत सिंह ने पुलिस टीम को मौके पर भेजा। पुलिस की देखरेख में शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।
निगरानी पर बड़ा सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि
क्या नशा मुक्ति केंद्रों की नियमित जांच होती है?
क्या यहां प्रशिक्षित स्टाफ और चिकित्सकीय निगरानी मौजूद है?
भर्ती युवाओं की सेहत पर लगातार नजर रखी जाती है या नहीं?
हर पहलू से जांच : एएसपी
मामले की पुष्टि करते हुए एडिशनल एसपी राजेश उपाध्याय ने बताया कि पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम करवा दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
युवक की मौत ने न केवल परिजनों का जीवन उजाड़ दिया है, बल्कि नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।