एनएच03 ( वाया टोनी देवी आवाहदेवी) के निर्माण कार्य में जुटी कंपनी प्रबंधन यह दावा कर रहा है कि राजमार्ग-03 को 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन ज़मीनी सच्चाई इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।
टोनी देवी पुलिस चौकी के नज़दीक कंपनी का एक टिप्पर पिछले करीब दो हफ्तों से सड़क के बीचो-बीच खराब हालत में खड़ा है—मानो किसी बड़ी दुर्घटना के होने का इंतज़ार कर रहा हो। सवाल सीधा है:
जिस कंपनी से राजमार्ग पूरा करने की उम्मीद की जा रही है, वह अपने एक खराब टिप्पर को तक समय पर रिपेयर नहीं करवा पा रही—तो 31 मार्च का दावा कितना खोखला है?
यह टिप्पर न केवल यातायात में बाधा है, बल्कि किसी भी समय जानलेवा हादसे का कारण बन सकता है। आम नागरिक का छोटा वाहन यदि कुछ देर के लिए भी सड़क पर खराब हो जाए, तो पुलिस तुरंत उसे हटाने के निर्देश देती है।
तो क्या यह नियम इस कंपनी पर लागू नहीं होते?
क्या कंपनी कानून और सुरक्षा मानकों से ऊपर है?
गौरतलब है कि यह राजमार्ग पिछले करीब 5 वर्षों से निर्माणाधीन है। इन पांच वर्षों में हमने—स्थानीय लोग और पत्रकार—भारी बरसात, कड़ाके की ठंड और भीषण गर्मी में मौके पर जाकर लोगों की समस्याएं लगातार उठाईं।
कंपनी, प्रशासन, सरकार, NHAI और MoRTH—सबको बार-बार अवगत कराया गया, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
आज रविवार को भी कोट से लेकर आवाहदेवी तक निर्माणाधीन राजमार्ग का बारीकी से निरीक्षण किया गया।
इस निरीक्षण से जुड़ी सभी सच्चाइयाँ, सोमवार को एक्सक्लूसिव वीडियो और फोटोज़ के साथ सार्वजनिक की जाएंगी।
यह चेतावनी नहीं, जनहित में उठाया गया सवाल है—
दुर्घटना कभी भी, किसी के साथ भी हो सकती है।
कम से कम 31 मार्च से पहले उस टिप्पर को हटाकर या रिपेयर करवाकर यह साबित किया जाए कि कंपनी को लोगों की जान की परवाह है, सिर्फ़ काग़ज़ी डेडलाइन की नहीं।
