अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भाजपा नेत्री एवं पूर्व प्रधान उषा बिरला ने सभी माताओं, बहनों और बेटियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव शक्ति, सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक माना गया है। उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत प्राचीन श्लोक “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” से करते हुए कहा कि इसका अर्थ है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा कि यह श्लोक हमारे समाज को यह संदेश देता है कि नारी का सम्मान ही एक सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला है।
उषा बिरला ने कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का लोहा मनवा रही है। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं की भागीदारी राजनीति, शिक्षा, प्रशासन, व्यापार, खेल और समाज सेवा जैसे सभी क्षेत्रों में निरंतर बढ़ रही है, जो एक सशक्त और विकसित भारत की पहचान है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और इतिहास में भी महिलाओं ने समय-समय पर अपने साहस, नेतृत्व और त्याग से समाज को नई दिशा दी है। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई, महान समाज सुधारक अहिल्याबाई होल्कर, स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना बेगम हज़रत महल और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसी महान महिलाओं ने अपने साहस और दूरदर्शिता से देश और समाज को नई दिशा दी।
उषा बिरला ने कहा कि आज के दौर में भी महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, खेल और राजनीति के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन करने वाली कल्पना चावला, मुक्केबाजी में देश का गौरव बढ़ाने वाली मैरी कॉम और बैडमिंटन में विश्व स्तर पर पहचान बनाने वाली पी. वी. सिंधु जैसी महिलाओं ने यह सिद्ध किया है कि यदि अवसर और प्रोत्साहन मिले तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनसे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और समाज में अपनी मजबूत पहचान बनाने का अवसर मिल रहा है। आज गांव से लेकर शहर तक महिलाएं पंचायतों, नगर निकायों और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिससे देश का लोकतंत्र और अधिक मजबूत हो रहा है।
उन्होंने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि हमें अपनी बेटियों को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर देकर उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। जब समाज में महिलाओं को समान अधिकार और अवसर मिलेंगे, तभी हमारा देश वास्तव में प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा।
अंत में उषा बिरला ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, अधिकार और उनके योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए मिलकर कार्य करें और एक समतामूलक व सशक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
