हिमाचल प्रदेश और आसपास के इलाकों में इस बार मौसम ने ऐसा पलटा मारा है कि विज्ञान और पुराने अनुमान भी फीके पड़ गए हैं। आमतौर पर मार्च में जहां गर्मी दस्तक देने लगती है, वहीं इस बार ठंड ने दोबारा वापसी कर लोगों को स्वेटर-जैकेट निकालने पर मजबूर कर दिया है।
देश भर में
शुक्रवार को अधिकतम तापमान महज 20.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह आंकड़ा बीते 56 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ने वाला साबित हुआ। मौसम विशेषज्ञ डॉ. पवनीत कौर के अनुसार, मार्च महीने में दिन का तापमान इतना कम पहले कभी दर्ज नहीं किया गया।
इससे पहले साल 1970 में अधिकतम तापमान 20.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, लेकिन इस बार का आंकड़ा उससे भी नीचे चला गया—जो इस बदलाव को ऐतिहासिक बना देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा तापमान आमतौर पर जनवरी की कड़ाके की सर्दी में देखने को मिलता है, न कि मार्च में!
मार्च में मानसून जैसा माहौल
शुक्रवार सुबह से शहर के अलग-अलग हिस्सों में रुक-रुक कर हल्की बारिश होती रही और करीब 5 एमएम वर्षा दर्ज की गई। हैरानी की बात यह रही कि यह बारिश प्री-मॉनसून जैसी नहीं, बल्कि सावन-भादो की झड़ी जैसी महसूस हुई। ठंडी हवाओं और नमी ने पूरे माहौल को जनवरी जैसा बना दिया।
मौसम में अचानक बदलाव की वजह
मौसम विभाग के अनुसार, इस असामान्य स्थिति के पीछे मुख्य कारण है:
मजबूत पश्चिमी विक्षोभ
पहाड़ी इलाकों में लगातार बर्फबारी
मैदानी क्षेत्रों में ठंडी हवाओं का दबाव
इन कारणों से सूरज की गर्मी धरती तक नहीं पहुंच पा रही, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है
मार्च में इस तरह की ठंड और बारिश न सिर्फ असामान्य है, बल्कि बदलते मौसम चक्र की ओर भी इशारा करती है। आने वाले दिनों में अगर यही स्थिति बनी रहती है, तो इसका असर फसलों और जनजीवन पर भी देखने को मिल सकता है।
