हिमाचल प्रदेश में प्रस्तुत बजट 2026-27 में पेंशनरों, विशेषकर परिवहन विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की अनदेखी को लेकर भारी रोष व्याप्त है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुख्खू द्वारा बजट में उनकी लंबित देनदारियों के लिए कोई ठोस प्रावधान न किए जाने से पेंशनर वर्ग में नाराजगी बढ़ गई है।
हिमाचल परिवहन सेवा निवृत्त कर्मचारी कल्याण मंच के प्रदेशाध्यक्ष वृजलाल ठाकुर, कार्यकारी अध्यक्ष अजमेर ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष चमन लाल पुंडीर, महामंत्री रूप चंद शर्मा, अतिरिक्त मंत्री रामलाल ठाकुर, मुख्य सलाहकार बलराम पुरी और संगठन मंत्री अशोक प्राशर सहित सभी पदाधिकारियों ने सरकार के इस रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की है।
कार्यकारी अध्यक्ष अजमेर ठाकुर ने बताया कि परिवहन पेंशनरों का लगभग 1200 करोड़ रुपये सरकार पर बकाया है, लेकिन बजट में इसके भुगतान को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि अन्य विभागों के कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ-साथ HRTC कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता दिया गया है, जबकि परिवहन पेंशनरों को इससे वंचित रखा गया है।
उन्होंने आगे बताया कि अन्य विभागों के पेंशनरों को संशोधित वेतनमान की एक किस्त (50,000 रुपये) और आयु के आधार पर दूसरी किस्त दी जा चुकी है, लेकिन HRTC पेंशनरों को अब तक कोई भुगतान नहीं मिला है। 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को अन्य विभागों में पूरा एरियर मिल चुका है, जबकि परिवहन पेंशनर इससे भी वंचित हैं।
पेंशनरों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से चिकित्सा बिलों का भुगतान तक नहीं किया गया है।
पेंशनर मंच ने कहा कि इस बजट में उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है, जिससे वे बेहद आहत हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनकी देनदारियों के लिए अतिरिक्त बजट प्रावधान किया जाए, पेंशन का स्थायी समाधान निकाला जाए और हर महीने की पहली तारीख को पेंशन देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
पेंशनरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वे 30 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा आयोजित विशाल धरने में हजारों की संख्या में अपने परिवारों सहित भाग लेंगे और विधानसभा का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि इस दौरान किसी भी वृद्ध पेंशनर के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी हिमाचल प्रदेश सरकार की होगी।
