देशभर में टेलीकॉम कंपनियों के रिचार्ज प्लानों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कंपनियां “एक महीने” के नाम पर सिर्फ 28 दिन की वैलिडिटी देकर आम जनता के साथ मनमानी कर रही हैं देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां—Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea—अपने अधिकांश प्रीपेड प्लान 28 दिन की वैलिडिटी के साथ पेश कर रही हैं। जबकि एक सामान्य कैलेंडर महीना 30 या 31 दिनों का होता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को साल में 12 के बजाय 13 बार रिचार्ज करवाना पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता हर 28 दिन में ₹349 का रिचार्ज करता है, तो उसे साल में 13 बार भुगतान करना पड़ता है। यानी सीधे तौर पर एक अतिरिक्त रिचार्ज का खर्च। यदि इस गणना को देशभर के करोड़ों यूज़र्स पर लागू किया जाए, तो कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ होता है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जहां एक घर में 3 से 5 मोबाइल फोन होना आम बात है, वहां यह अतिरिक्त खर्च परिवार के मासिक बजट पर सीधा असर डाल रहा है।
हमीरपुर व्यापार मंडल के प्रधान सुमित ठाकुर ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनियों का यह रवैया “पूरी तरह अनुचित” है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
नियामक की भूमिका पर सवाल
टेलीकॉम क्षेत्र के नियामक Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने कंपनियों को 30 दिन और 365 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, ऐसे प्लान सीमित विकल्पों में और अपेक्षाकृत महंगे बताए जा रहे हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि:
“एक महीने” का मतलब पूरा कैलेंडर महीना होना चाहिए
सभी कंपनियों को 30 दिन की वैलिडिटी अनिवार्य रूप से देनी चाहिए
रिचार्ज प्लानों में पारदर्शिता बढ़ाई जानी चाहिए
इसके अलावा, एक बड़ी समस्या यह भी सामने आ रही है कि जैसे ही 28 दिन पूरे होते हैं, फोन की इनकमिंग और आउटगोइंग सेवाएं बंद हो जाती हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को मजबूरी में तुरंत रिचार्ज कराना पड़ता है, जिसमें 25–40 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ भी जुड़ जाता है।
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का साधन नहीं, बल्कि आधार कार्ड, बैंकिंग, राशन और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़ा अहम माध्यम बन चुका है। ऐसे में सेवाएं बंद होना लोगों की दैनिक जिंदगी पर सीधा असर डालता है।
28 दिन की वैलिडिटी का मुद्दा अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा बड़ा विषय बन चुका है। यदि समय रहते इस पर संतुलित समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है—और लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर भी कर सकता है।
