मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। इस टकराव का सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ रहा है, जिससे दुनिया के कई देशों में ईंधन संकट गहराने लगा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक संकट की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता जोखिम है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती है।
तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ने से तेल आयात करने वाले देशों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसका असर आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर पड़ सकता है।
दुनिया के देशों ने लागू किए आपात कदम
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई देशों ने सख्त फैसले लिए हैं—
पाकिस्तान: सरकारी दफ्तरों में 4 दिन का कार्य सप्ताह, ईंधन उपयोग में भारी कटौती।
म्यांमार: वाहनों के नंबर के आधार पर पेट्रोल वितरण, कई पंप बंद।
यूरोपीय देश: वर्क फ्रॉम होम, पब्लिक हॉलिडे और स्कूलों में अस्थायी छुट्टियां।
अन्य देश: पेट्रोल-डीजल पर लिमिट, बिजली बचत अभियान और औद्योगिक उत्पादन में कटौती।
भारत में स्थिति नियंत्रण में, लेकिन चिंता बरकरार
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल LPG और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई सामान्य है।
हालांकि, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में अगर संकट लंबा खिंचता है तो घरेलू बाजार पर भी असर पड़ सकता है। महंगाई बढ़ने के संकेत
ऊर्जा संकट का असर आम जनता पर भी पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और दवाइयों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। विशेषज्ञों ने महंगाई दर में उछाल की चेतावनी दी है।
स्थिति बिगड़ी तो बढ़ेगा वैश्विक संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य नहीं होती, तो दुनिया को बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
मिडिल ईस्ट का मौजूदा तनाव अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। कई देश जहां आपात कदम उठा रहे हैं, वहीं भारत फिलहाल सुरक्षित स्थिति में है, लेकिन आने वाले समय में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।
