राष्ट्रीय राजमार्ग-03 (NH-03) का निर्माण जहां कागज़ों में विकास की नई इबारत लिख रहा है, वहीं जमीनी हकीकत सपनेहडा गांव के लोगों के लिए डर, दर्द और परेशानियों की कहानी बन चुकी है। गांववासियों ने उपायुक्त हमीरपुर को शिकायत सौंपते हुए निर्माण कंपनी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब 5 वर्षों से निर्माण कार्य के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। पटनौण चौक के पास सड़क को उखाड़कर अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे आम लोगों का चलना तक मुश्किल हो गया है। धूल और गड्ढों से भरी सड़क अब हादसों का अड्डा बन चुकी है।
“हर दिन हादसे, हर पल डर”
गांववासियों के मुताबिक, सड़क की बदहाली के कारण आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं। बुधवार को भी दो लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। हालात ऐसे हैं कि लोग इस रास्ते से गुजरने से भी कतराने लगे हैं।
बारिश ने खोल दी सच्चाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोग झूठा प्रचार कर रहे हैं कि NH-03 पूरी तरह तैयार हो चुका है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
बारिश के बाद जगह-जगह पानी भर गया, नालों का बहाव रुक गया और कई स्थानों पर सड़क टूटने लगी। हाल ही में हुई मरम्मत भी पहली ही बारिश में बह गई, जिससे निर्माण कंपनी की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
“विकास नहीं, विनाश का रास्ता”
ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क से विकास की उम्मीद थी, वही अब मुसीबतों की जड़ बन गई है। धूल, कीचड़, जलभराव और अधूरा निर्माण—ये सब मिलकर लोगों का जीना दूभर कर रहे हैं।
प्रशासन पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और NHAI अधिकारियों को शिकायतें दीं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ नहीं हुआ।
उपायुक्त से सख्त कार्रवाई की मांग
सपनेहडा गांववासियों ने उपायुक्त से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि लोगों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस “विकास के नाम पर विनाश” को रोक पाएगा, या फिर सपनेहडा के लोग यूं ही खतरे के साए में जीते रहेंगे?
