टिकारी मिन्हास पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन ज़मीन पर काम नजर नहीं आ रहा।

टिकरी मिन्हास पंचायत में विकास के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। श्मशान घाट के रास्ते के लिए स्वीकृत ₹4 लाख की राशि पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है—“कागजों में पैसा खर्च, जमीन पर कुछ भी नहीं!”

धरातल पर शून्य, फाइलों में पूरा खर्च!

15वें वित्त आयोग से मिले ₹4 लाख का हिसाब मांग रहे ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर न तो रास्ता बना और न ही कोई ठोस निर्माण दिखता है। सवाल सीधा है—आखिर पैसा गया कहां?

सरकारी जमीन पर अवैध खुदाई का आरोप

मामला यहीं नहीं रुकता। पंचायत पर बिना अनुमति सरकारी जमीन पर जेसीबी से खुदाई कराने के आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों ने पूछा—किसकी इजाजत से सरकारी जमीन को छेड़ा गया? क्या विभाग से कोई मंजूरी ली गई?

उपायुक्त तक पहुंची शिकायत, अब विजिलेंस जांच

ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच की मांग की। अब केस विजिलेंस विभाग के पास पहुंच चुका है। सभी संबंधित पक्षों को सोमवार को रिकॉर्ड सहित तलब किया गया है।

मामला गरमाया तो शुरू हुआ काम!

हैरानी की बात यह है कि जैसे ही मामला अधिकारियों तक पहुंचा, आनन-फानन में मजदूर लगाकर काम शुरू करवाया गया। लेकिन ग्रामीणों ने मोर्चा संभालते हुए काम रुकवा दिया और साफ कह दिया—“पहले जांच, फिर निर्माण!”

बयान बदल-बदल कर बढ़ा शक

कोई कहता है ₹4 लाख डंगे में लगे

दस्तावेज बताते हैं—राशि रास्ते के लिए थी

ऊपर से ₹1 लाख डंगे के लिए अलग

इतने विरोधाभास… कहीं बड़ा खेल तो नहीं?

चुनाव से पहले अचानक सक्रियता क्यों?

पंचायतें भंग, चुनाव नजदीक… और अचानक काम शुरू! ग्रामीणों का सवाल—क्या ये चुनावी स्टंट है या घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश?

₹4 लाख नहीं, करोड़ों का खेल?

सूत्रों की मानें तो यह सिर्फ एक एंट्री है—पंचायत में करोड़ों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है।

अब विजिलेंस के हाथ में सच

पूरा इलाका अब विजिलेंस जांच पर टिका है। लोगों की मांग साफ है—

दोषियों को बख्शा न जाए

हर पैसे का हिसाब सार्वजनिक हो

अब देखना ये है—क्या सच सामने आएगा या फा इलों में ही दब जाएगा?

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Author: powan dhiman

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