जिन्होंने महिलाओं के अधिकार रोके, देश की माताएं-बहनें देंगी जवाब: अनुराग सिंह ठाकुर

बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी पर 17 अप्रैल 2026 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने से रोकने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण विधेयक को विफल कर विपक्षी गठबंधन ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया को बाधित किया है। उन्होंने बताया कि यह पांचवीं बार है जब इस गठबंधन ने महिला आरक्षण को रोका है और इतिहास में पहली बार कांग्रेस ने सीधे तौर पर महिला आरक्षण के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया है।

परिसीमन को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होने का दावा पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित 50 प्रतिशत फार्मूले के तहत सभी दक्षिणी राज्यों को 2011 की जनगणना के अनुमान से भी अधिक सीटें मिलेंगी। तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59, केरल की 20 से 30, कर्नाटक की 28 से 42, आंध्र प्रदेश की 25 से 37 और तेलंगाना की 17 से 25 हो जाएंगी।

उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिणी राज्यों की कुल हिस्सेदारी लोकसभा में घटने के बजाय 23.76 प्रतिशत से बढ़कर 23.90 प्रतिशत हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह दावा कि दक्षिण भारत को नुकसान होगा, पूरी तरह झूठ है और किसी भी राज्य की प्रतिनिधित्व क्षमता में कोई कमी नहीं आएगी।

लोकतांत्रिक असमानता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में लक्षद्वीप का एक मतदाता मल्काजगिरी के मतदाता की तुलना में 65 गुना अधिक प्रभाव रखता है, जो लोकतंत्र के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1976 से 2026 तक परिसीमन को टालकर तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक लाभ उठाया, जिसे वर्तमान सरकार सुधारने का प्रयास कर रही है।

कांग्रेस के पिछले पांच दशकों के रुख पर प्रकाश डालते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि 1996 में कांग्रेस के पास पर्याप्त समर्थन होने के बावजूद उसने महिला आरक्षण विधेयक को पारित नहीं होने दिया। 1998 से 2003 के बीच विभिन्न प्रयासों के दौरान भी कांग्रेस ने आवश्यक समर्थन नहीं दिया।

उन्होंने वर्ष 2010 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्यसभा में भारी बहुमत से पारित होने के बावजूद लोकसभा में विधेयक को पेश नहीं किया गया और इसे लंबित रखकर समाप्त होने दिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में केवल इसलिए मतदान किया क्योंकि उसका क्रियान्वयन परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था, जिससे इसे भविष्य के लिए टाल दिया गया। लेकिन जब 2026 में इस प्रक्रिया को तेज कर 2029 के चुनावों में लागू करने का प्रयास किया गया, तो कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इसका विरोध किया।

उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस ने विलंब के पक्ष में और क्रियान्वयन के खिलाफ मतदान किया। विपक्ष द्वारा जाति जनगणना और अन्य वर्गों के अधिकारों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जाति जनगणना एक अलग प्रक्रिया है और संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता।

अनुराग सिंह ठाकुर ने चेतावनी दी कि देश की माताएं और बहनें इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेंगी और उचित समय पर इसका जवाब देंगी।

 

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Author: powan dhiman

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