आगामी पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर प्रशासन सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। लेखा परीक्षण (ऑडिट) में जिन पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ वसूली की राशि लंबित पाई गई है, उन्हें अब चुनाव लड़ने के लिए ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी नहीं किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति ने सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की सिफारिश करते हुए कहा है कि लंबित देयों की पूर्ण वसूली से पहले किसी भी संबंधित व्यक्ति को NOC न दी जाए। समिति ने यह भी माना कि कई मामलों में लेखा आपत्तियों और अनियमित खर्चों की रिकवरी में अनावश्यक देरी हो रही है, जिसे तुरंत दुरुस्त करने की आवश्यकता है।
उपायुक्त हमीरपुर ने जिला स्तर पर निर्देश जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि जिन पंचायतों, नगर पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों में वसूली लंबित है, वहां के पूर्व प्रतिनिधियों को NOC प्रमाण पत्र जारी न किया जाए। इस फैसले से कई पूर्व जनप्रतिनिधियों के चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के चुनाव लड़ने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासन ने इस विषय पर राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। जवाब मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि पिछले चुनावों में इस प्रकार की कोई रोक नहीं थी और कई स्थानों पर इन कार्यकर्ताओं ने पंचायत प्रतिनिधि, प्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला परिषद सदस्य के रूप में सफलता हासिल की थी
लंबित वसूली वालों को नहीं मिलेगा NOC
लेखा समिति ने दिए सख्त निर्देश
जिला प्रशासन ने लागू किए आदेश
आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर निर्णय लंबित प्रशासन का कहना
“जिनके खिलाफ वसूली लंबित है, उन्हें NOC जारी नहीं की जाएगी। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संबंध में सरकार से मार्गदर्शन मांगा गया है।”
— उपायुक्त एवं इलेक्शन कमिश्नर, हमीरपुर
