सरकारी सीमेंट बना पत्थर, नाल्टी पंचायत में विकास के नाम पर लाखों के घोटाले के आरोप

जिला हमीरपुर की नाल्टी पंचायत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सरकारी धन के दुरुपयोग का जीता-जागता उदाहरण बनी इस पंचायत में विकास कार्यों के लिए भेजा गया सरकारी सीमेंट महीनों तक उपयोग का इंतजार करता रहा और अब हालत यह है कि जंजघरों में पड़ी सीमेंट की बोरियां पूरी तरह पत्थर बन चुकी हैं।

 

जानकारी के अनुसार पिछली बरसात के दौरान पंचायत में किसी निर्माण कार्य के लिए बड़ी मात्रा में सीमेंट पहुंचाया गया था, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह सीमेंट आखिर किस विकास कार्य में इस्तेमाल होना था। उपयोग तो दूर, पंचायत प्रशासन इसे सुरक्षित रखने में भी पूरी तरह विफल रहा।

 

मौके पर देखने पर सामने आया कि वार्ड नंबर-2 के जंजघर में रखे करीब 30 बैग और वार्ड नंबर-5 के जर्जर जंजघर में पड़े लगभग 60 बैग सीमेंट पूरी तरह खराब हो चुके हैं। इतना ही नहीं, एक नए जंजघर में भी सीमेंट पड़ा मिला, जहां न खिड़कियां हैं और न ही दरवाजे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पूर्व पंचायत किस प्रकार का विकास कार्य कर रही थी।

 

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर सरकारी संसाधनों की खुलेआम बर्बादी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस सीमेंट का उपयोग किया जाता तो पंचायत में कई जरूरी निर्माण कार्य पूरे किए जा सकते थे, लेकिन लापरवाही और जवाबदेही की कमी ने सरकारी धन को मिट्टी में मिला दिया।

 

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पूर्व पंचायत के कार्यकाल में जिन विकास कार्यों पर लाखों रुपये खर्च होने थे, वहां अब घोटाले की बू आने लगी है। मौके पर पड़ा सीमेंट पूरी तरह पत्थर बन चुका है, जिससे साफ जाहिर होता है कि लंबे समय से इसका कोई उपयोग नहीं किया गया।

 

बताया जा रहा है कि खराब हुए सीमेंट की कीमत करीब 35 से 40 हजार रुपये के बीच है। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर इस नुकसान का जिम्मेदार कौन है — पंचायत प्रतिनिधि, संबंधित अधिकारी या फिर पूरा सिस्टम?

 

ग्रामीणों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पंचायतों को विकास के नाम पर करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन यदि यही पैसा जंजघरों में सड़कर पत्थर बनना है तो विकास के दावों का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

 

नाल्टी पंचायत की यह तस्वीर केवल एक पंचायत की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है जहां सरकारी धन की निगरानी करने वाला कोई नजर नहीं आता।

 

इस मामले पर नीना सोनी ने कहा कि मामला अभी उनके ध्यान में नहीं है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मौके का निरीक्षण कर उचित जांच की जाएगी।

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Author: powan dhiman

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