जब बड़े बने मूकदर्शक, तब नन्हे हाथों ने संभाली गांव की जिम्मेदारी!

जहां एक ओर सार्वजनिक संपत्तियां अक्सर लापरवाही और उपेक्षा की भेंट चढ़ जाती हैं, वहीं ग्राम पंचायत जख्योल के कुछ नन्हे बच्चों ने ऐसा उदाहरण पेश किया है जिसने पूरे गांव को आईना दिखाने का काम किया है। गांव की प्याऊ में फैली गंदगी और बदहाल स्थिति को देखकर इन बच्चों ने किसी पंचायत, विभाग या बड़े-बुजुर्ग के आगे आने का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद फावड़ा, झाड़ू और सफाई का जिम्मा उठाकर मैदान में उतर गए।

गांव के आदर्श, नितिन, पियूष, करण, अविनाश, अद्विक और उनके साथियों ने सामूहिक प्रयास से घंटों मेहनत कर प्याऊ को साफ-सुथरा बनाया। जिस जगह को लोग नजरअंदाज कर आगे निकल जाते थे, वहां इन बच्चों ने श्रमदान कर स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का अनूठा संदेश दिया।

सबसे बड़ी बात यह रही कि जिन सार्वजनिक स्थलों की देखरेख की जिम्मेदारी समाज और व्यवस्था पर होती है, वहां बच्चों ने आगे बढ़कर साबित कर दिया कि बदलाव के लिए बड़े पद या बड़ी उम्र नहीं, बल्कि बड़ा जज्बा चाहिए। बच्चों की इस पहल की अब पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है और लोग उनकी सराहना करते नहीं थक रहे।

इस दौरान ग्राम पंचायत जख्योल के प्रधान नेक राम भी मौके पर पहुंचे और बच्चों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि आज इन बच्चों ने जो कार्य किया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक अपने गांव और सार्वजनिक संपत्तियों को अपना समझकर उनकी देखभाल करे तो विकास और स्वच्छता दोनों सुनिश्चित हो सकते हैं।

प्रधान नेक राम ने ग्रामीणों से भी आह्वान किया कि वे बच्चों से प्रेरणा लेते हुए गांव के विकास और स्वच्छता अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव की असली पहचान केवल भवनों और सड़कों से नहीं, बल्कि वहां के लोगों की जागरूकता, एकता और सामाजिक जिम्मेदारी से बनती है।

आज जख्योल गांव में एक ही चर्चा है कि “जब बड़े जिम्मेदारी निभाने में पीछे रह गए, तब नन्हे बच्चों ने आगे बढ़कर गांव की आन, बान और पहचान को बचाने का बीड़ा उठा लिया।” बच्चों की यह पहल न केवल स्वच्छता का संदेश दे रही है, बल्कि समाज को यह भी सिखा रही है कि बदलाव की शुरुआत किसी भी उम्र से की जा सकती

है।

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Author: powan dhiman

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