खोहली स्कूल बंद करने के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों का प्रदर्शन, एक सप्ताह में बहाली नहीं हुई तो 13 जुलाई को होगा बड़ा आंदोलन

जोगिंदर नगर उपमंडल की ऐहजू पंचायत के खोहली गांव स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला खोहली को बंद कर ऐहजू स्कूल में मर्ज करने के प्रदेश सरकार के फैसले के विरोध में रविवार को ग्रामीणों ने जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में स्कूल परिसर के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समिति, महिला मंडल, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने भाग लिया।

कुशाल भारद्वाज ने सरकार के फैसले को बच्चों के भविष्य और ग्रामीण शिक्षा के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि स्कूल को बंद कराने की सिफारिश करने वालों की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने प्रदेश सरकार को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि स्कूल को पुनः बहाल नहीं किया गया तो 13 जुलाई को एसडीएम कार्यालय के बाहर विशाल प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद भी अधिसूचना वापस नहीं ली गई तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि स्कूल में वर्तमान में 12 बच्चे अध्ययनरत थे, जिनमें छह प्राइमरी और छह प्री-प्राइमरी के विद्यार्थी हैं। उन्होंने कहा कि केवल कम छात्र संख्या का हवाला देकर स्कूल बंद करना उचित नहीं है, क्योंकि यहां 3-4 गांवों के बच्चे पढ़ते हैं और निकट का दूसरा स्कूल काफी दूर है। क्षेत्र में जंगली जानवरों और आवारा पशुओं का खतरा भी बना रहता है, जबकि अधिकांश अभिभावक दिहाड़ी मजदूर हैं और रोजाना बच्चों को दूर स्कूल छोड़ने-लाने में सक्षम नहीं हैं।

भारद्वाज ने कहा कि सरकार का फैसला शिक्षा के अधिकार कानून की भावना के भी विपरीत है। उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से स्कूल को पुनः बहाल करने की मांग की।

इस दौरान पंचायत प्रधान बीरबल, पूर्व उपप्रधान विनोद गौतम और एसएमसी प्रधान कंचन ने कहा कि वर्ष 1975 में स्थापित इस स्कूल को बंद करना क्षेत्र के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने स्कूल के लिए भूमि दान की थी और अब सभी लोग 13 जुलाई को जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

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Author: powan dhiman

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