पिछले वर्ष मानसून की बारिश में ढाबण पंचायत की नैंसी का जर्जर घर हर बूंद के साथ उसकी मजबूरियों की कहानी बयां कर रहा था। छत से टपकता पानी, घर में राशन का अभाव, 80 प्रतिशत मानसिक रूप से दिव्यांग पिता और 13 वर्षीय छोटे भाई की जिम्मेदारी… लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बीच भी नैंसी ने हिम्मत नहीं छोड़ी। वह परिवार का सहारा बनने के साथ-साथ नर्सिंग की पढ़ाई भी जारी रखे हुए है।
इसी दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की नजर इस परिवार पर पड़ी और मामला एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी तक पहुंचा। उन्होंने इसे केवल सरकारी फाइल का विषय नहीं माना, बल्कि परिवार की जिंदगी बदलने का संकल्प लिया। सबसे पहले प्रशासन की ओर से राशन, कंबल, तिरपाल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई गई। इसके बाद लगातार प्रयास कर दोनों बच्चों को मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना से जोड़ा गया, जिसके तहत अब दोनों को प्रतिमाह चार-चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है।
एसडीएम स्मृतिका नेगी ने कई बार परिवार का दौरा किया। उन्हें महसूस हुआ कि केवल राहत सामग्री से इस परिवार का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। इसके बाद उन्होंने स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए और मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के तहत मकान निर्माण की स्वीकृति दिलाकर पहली किस्त जारी करवाई।
यहीं से समाज भी इस मुहिम का हिस्सा बन गया। एसडीएम के आग्रह पर मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट ने दो कमरों, रसोई और स्नानघर वाले पक्के मकान के निर्माण का जिम्मा लिया। हरदेव सैनी ने निःशुल्क सीमेंट दिया, राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने करीब 70 हजार रुपये की ईंटों का सहयोग किया और गांव के लोगों ने भी अपनी क्षमता अनुसार मदद की। आज प्रशासन, सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों से नैंसी का नया आशियाना आकार ले रहा है।
एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी ने कहा कि यदि समाजसेवी संस्थाएं और सक्षम लोग जरूरतमंद परिवारों के साथ इसी तरह खड़े हों तो कोई भी बच्चा अभाव में जीवन बिताने को मजबूर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सार्थक बनती हैं, जब उनमें समाज की संवेदनशील भागीदारी भी जुड़ जाती है।