सफलता की कहानी स्वयं सहायता समूह से जोमैटो तक का सफर, पायल शर्मा की मेहनत ने लिखी सफलता की नई कहानी

सफलता की कहानी स्वयं सहायता समूह से जोमैटो तक का सफर, पायल शर्मा की मेहनत ने लिखी सफलता की नई कहानी

स्वयं सहायता समूह से जोमैटो तक का सफर, पायल शर्मा की मेहनत ने लिखी सफलता की नई कहानी

सरकारी योजनाओं के सहयोग से खड़ा किया सफल व्यवसायप्रतिमाह 60 से 70 हजार रुपये की आय

यदि मेहनत के साथ सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिल जाए तो आत्मनिर्भर बनने का सपना साकार हो सकता है।” सुंदरनगर की पायल शर्मा ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न केवल अपना सफल व्यवसाय स्थापित कियाबल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।

नगर परिषद सुंदरनगर के वार्ड नंबर-5 बड़ोह निवासी पायल शर्मा वर्ष 2017 में मुरारी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। वर्तमान में वह समूह की प्रधान और एरिया लेवल फेडरेशन की अध्यक्ष भी हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर मिले और आत्मविश्वास भी बढ़ा। समूह की महिलाओं ने स्वच्छता अभियान में उल्लेखनीय योगदान दियाजिसके लिए उन्हें दिल्ली में सम्मानित किया गया तथा एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी प्राप्त हुई।

*घर से शुरू हुआ कामआज बना सफल प्रतिष्ठान*

पायल शर्मा ने घर से सिड्डू और कचौरी बनाने का कार्य शुरू किया। मेहनतलगन और सरकारी योजनाओं से मिली वित्तीय सहायता के बल पर आज उन्होंने शर्मा सिड्डू कचौरी जोन‘ नाम से अपना प्रतिष्ठान स्थापित किया है। यहां सिड्डूकचौरीबाबरूमोमोजपरांठामैगी सहित नाश्तादोपहर एवं रात्रि भोजन की सुविधा उपलब्ध है। उनका प्रतिष्ठान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जोमैटो के माध्यम से भी ग्राहकों तक अपनी सेवाएं पहुंचा रहा है। उनके पति भी इस व्यवसाय में बराबर की भागीदारी निभाते हैं और ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों माध्यमों से ऑर्डर लिए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह को 10 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड मिला। इसके अतिरिक्त तीन लाख रुपये का बैंक ऋण तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत 40 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आज उनका प्रतिष्ठान सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है।

*स्वरोजगार बना परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार*

बकौल पायल शर्मा अपने व्यवसाय से वह प्रतिमाह लगभग 60 से 70 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने अपने प्रतिष्ठान में दो लोगों को नियमित रोजगार भी उपलब्ध करवाया है। उनकी बेटी डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय हमीरपुर में फूड टेक्नोलॉजी में बी.टेक. की पढ़ाई कर रही हैंजबकि बेटा राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुंदरनगर में ग्यारहवीं कक्षा का छात्र है। व्यवसाय से होने वाली आय से बच्चों की शिक्षा सहित परिवार की आर्थिक जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं।

पायल शर्मा का कहना है कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने महिलाओं से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।

*सैकड़ों महिलाओं को मिल रहा योजनाओं का लाभ*

नगर परिषद सुंदरनगर क्षेत्र में वर्ष 2016 से अब तक 114 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इन समूहों को लगभग 3.50 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। 41 समूहों की क्रेडिट लिंकेज की जा चुकी है। इसके अलावा 111 लाभार्थियों को दो-दो लाख रुपये का ऋण 7 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराया गया है। वहीं 112 स्वयं सहायता समूहों को 10-10 हजार रुपये तथा सात एरिया लेवल फेडरेशन को 50-50 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड भी दिया गया है।

सरकारी योजनाओं के सहयोग से महिलाएं सफल उद्यमी बन रही हैंरोजगार के नए अवसर सृजित कर रही हैं और आत्मनिर्भर हिमाचल के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रही हैं। पायल शर्मा जैसी सफल कहानियां अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने और स्वरोजगार अपनाने की प्रेरणा देती हैं।

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Author: powan dhiman

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