भोरंज। उपमंडल भोरंज विधानसभा क्षेत्र के मिनी सचिवालय में इन दिनों व्यवस्था को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। जहां हर रोज क्षेत्र के हजारों लोग अपने जरूरी सरकारी काम करवाने पहुंचते हैं, वहीं सचिवालय के मुख्य गेट पर आवारा कुत्तों ने अपना डेरा जमा रखा है। हालात ऐसे नजर आ रहे हैं कि मानो मिनी सचिवालय सरकारी कार्यालय कम और आवारा कुत्तों का अड्डा ज्यादा बन गया हो।
स्थानीय लोगों के अनुसार मिनी सचिवालय के मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास कई आवारा कुत्ते दिनभर घूमते और बैठे नजर आते हैं। लोगों का आना-जाना लगातार लगा रहता है। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और विभिन्न कामों के लिए आने वाले ग्रामीण भी शामिल होते हैं। ऐसे में कुत्तों की मौजूदगी लोगों के लिए परेशानी के साथ-साथ सुरक्षा का बड़ा खतरा भी बन सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी दिन कोई आवारा कुत्ता किसी व्यक्ति को काट लेता है या उसके पीछे दौड़कर कोई हादसा हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? क्या प्रशासन किसी घटना के बाद जागेगा या उससे पहले ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में आम जनता की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जब मुख्य गेट पर ही आवारा कुत्तों का जमावड़ा लगा हो तो अंदर आने-जाने वाले लोगों में डर का माहौल पैदा होना स्वाभाविक है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय है।
घटना का इंतजार या पहले होगी कार्रवाई?
स्थानीय जनता का कहना है कि प्रशासन को किसी अप्रिय घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि आवारा कुत्तों की समस्या मिनी सचिवालय परिसर में लगातार बनी हुई है तो संबंधित विभाग को तत्काल उचित कार्रवाई करते हुए कुत्तों को परिसर से हटाने और भविष्य में उनके जमावड़े को रोकने की व्यवस्था करनी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ कुत्तों के सचिवालय परिसर में बैठने का नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का है। आखिर जिस मिनी सचिवालय के मुख्य गेट से रोजाना हजारों लोग सरकारी काम के लिए गुजरते हैं, वहां ऐसी स्थिति कब तक बनी रहेगी?
जनता पूछ रही है—पहले कार्रवाई होगी या फिर किसी के घायल होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी अपनी नींद से जागेंगे?